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जानिए पाक महीने 'रमजान' और 'रोजा' के बारे में खास बातें..
इस्लामिक कैलेंडर
का यह
महीना त्याग,
सेवा, समर्पण
और भक्ति
का प्रतिक
है। पूरे
एक महीने
तक इस्लाम
में विश्वास
रखने वाले
लोग रोजा
रखेंगे।
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| impotent of ramadan |
मान्यता है
कि रमजान
के महीने
में जन्नत
के दरवाजे
खोल दिए
जाते हैं
और जो
रोजे रखता
हैं उसे
ही जन्नत
नसीब होती
है।
पैंगम्बर इस्लाम
के मुताबिक
रमजान महीने
का पहला
अशरा (दस
दिन) रहमत
का, दूसरा
अशरा मगफिरत
और तीसरा
अशरा दोजख
से आजादी
दिलाने का
है।
यह महीने
प्रेम और
अपने ऊपर
संयम रखने
का मानक
है इसलिए
कहा गया
है कि
हर मुसलमान
को रोजा
जरूर रखना
चाहिए।
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| Prayer in ramadan |
मासिक-धर्म
के दौरान
इस्लामिक महिलाओं
को रोजा
ना रखने
को कहा
गया है।
इस दौरान
केवल अल्लाह
की इबादत
करनी चाहिए
और सहरी
और इफ्तार
का खास
ख्याल रखना
चाहिए।
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| Prohibited during ramadan |
इस दौरान
शराब, सिगरेट,
तंबाकू और
नशीली चीजों
का सेवन
नहीं करना
चाहिए। बूढ़े,
बच्चे, गर्भवती
महिलाएं. नवजात
की मांओं
और सफर
करने वाले
यात्रियों को
रोजा ना
रखने की
मनाही है।
·
रमजान के
दौरान हर
मुस्लिम को
जकात देना
होता है।
आपको बता
दें कि
जकात का
मतलब अल्लाह
की राह
में अपनी
आमदनी से
कुछ पैसे
निकालकर जरूरतमंदों
को देना।
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| Donate during ramadan |
·
कहा जाता
है जकात
को रमजान
के दौरान
ही देना
चाहिए ताकि
गरीबों तक
वो पहुंचे
और वो
भी ईद
बना सकें।
·
रमजान का
मतलब बंदिश
(मनाही),सिर्फ
खाने पीने
की बंदिश
नहीं है
बल्कि हर
उस बुराई
से दूर
रहने की
बंदिश है
जो इस्लाम
में मना
है।
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| ramadan Iftar Party 2019 |
·
इस्लाम
के मुताबिक
रोज़ा केवल
भूखे प्यासे
रहने का
ही नाम
नहीं बल्कि
नब्ज़ को
व्यवस्थित और
शुद्धि करने
का नाम
है और
हर वर्ष
30 दिन अपनी
आत्मा को
शुद्ध करके
हम शेष
11 महीने इसी
जीवन को
जीने की
ट्रेनिंग पाते
हैं।








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